मिशन स्वच्छता _भाग : 06

कवि : सोमवारी लाल सकलानी, निशांत

(01) सुंदरता और स्वच्छता _ सुंदरता प्रकृति प्रदत्त है जबकि स्वच्छता और सौंदर्य करण मानवीय क्रियाएं हैं। किसी भी सुंदर वस्तु को बार-बार देखने के लिए मन करता है ।सुंदर बच्चा, सुंदर कविता ,सुंदर घर ,सुंदर फूल ,सुंदर प्रकृति आदि निहारने के लिए हम बार-बार उत्सुक रहते हैं। तथा कभी हम इनसे ऊबते नहीं हैं । सुंदरता ईश्वरीय वरदान है ,जिसे हम रुप /स्वरूप भी कहते हैं।

(02) स्वच्छता मानवीय क्रिया है । यह हमारे ऊपर निर्भर करती है हम शारीरिक एवं मानसिक रूप से कितनी स्वच्छ रहते हैं। अपने परिवेश को कितना स्वच्छ बना कर रखते हैं। घर -, गांव -शहर सड़क, मार्ग -पार्क ,विद्यालय अस्पताल आदि को कितना स्वच्छ बनाए रखते हैं।
इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना परम आवश्यक है। यह हमारे हाथ में है ।
( 03)स्वच्छता आकर्षण उत्पन्न करती है और यह आकर्षण बरबस निगाहों को अपनी ओर खींचता है। हर जुबान पर होता है , वाह ! कितना स्वच्छ वातावरण है ! सौंदर्य करण : स्वच्छता का ही एक भाग है । हम अपनी गतिविधियों, क्रियाकलाप और कार्यों के द्वारा स्वच्छ, स्वस्थ और आकर्षक वातावरण तैयार करते हैं । अधिक आकर्षण के लिए हम सौंदर्य करण करते हैं। अपने शरीर को सजाते हैं। घर ,गांव ,शहर को सजाते हैं । जिसके कारण स्वरूप यह भव्य लगने लगे और दिखने लगे ।
प्राकृतिक वस्तुओं जैसे -, फूल, पेड़ ,जलाशय आदि के द्वारा इसे सजाते हैं तथा मानवीय वस्तुओं जैसे गमले ,रंग- रोगन आदि से आकर्षक बनाते हैं । इस क्रिया से हमारे अंदर चैतन्यता का भाव उत्पन्न होता है ।
( 04)स्वच्छता के प्रकार _ स्वच्छता, सुंदरता एवं सौंदर्य करण के लिए परम आवश्यक है कि हम दो बातों पर विशेष ध्यान दें। शारीरिक और मानसिक स्वच्छता पर।
शारीरिक स्वच्छता प्रथम आकर्षण है यह भव्य है लेकिन दिव्य नहीं। उदाहरणार्थ – कोई कुरूप इंसान यदि मन, विचार, वाणी और कर्म से सुंदर है तो शारीरिक सुंदरता न होने पर भी वह सुंदरतम लगेगा। सुकरात ,मलिक मोहम्मद जायसी आदि अनेक ऐसे उदाहरण हैं ।
मन की सुंदरता तन की सुंदरता से ऊपर है । इसे बनाए रखना तथा ऊंचाई तक ले जाना हमारा कर्तव्य है ।
( 05)व्यक्तिगत और सामूहिक स्वच्छता :- स्वच्छता व्यक्तिगत और सामूहिक दो रूपों में परिलक्षित होती है। व्यक्तिगत स्वच्छता के द्वारा हमें, हमारे घर और परिवार को सभी पसंद करते हैं ।हमारे पास आते हैं ।आनंद से बैठते हैं। दोस्त बनते हैं । चाव से चाय -पानी पीते हैं ।भोजन ग्रहण करते हैं और कभी छी छी / थू – थू नहीं करते हैं। हमसे सीखते हैं और अनुसरण करते हैं ।
एक साफ-सुथरे अध्यापक या अभिभावक के बच्चे गरीबी के बावजूद भी स्वच्छ बने रहते हैं ।उनकी कलाइयों में कभी मैल नहीं जमता ।अध्यापक का कॉलर तभी मैला नहीं होता । सैनिक का बूट सूट हमेशा वेल पॉलिश्ड और वैल प्रेस्ड रहता है । दाढ़ी, बाल बने रहते हैं । बाल संवारे रहते हैं । दांतों की चमक निराली होती है ।
( 06) दृष्टांत – कभी मेरे विद्यालय में रामकृष्ण नाम का एक सफाई कर्मी या स्वेच्छक था। रंग- रूप इतना काला ककि उल्टा तवा लगता था। लेकिन दांत मोती जैसे चमकीले। उसके स्वच्छ दांतों की ज्योति के सामने उसका रूप /कालापन गौण था ।वह रोज मंजन करता था और हम सब को सबसे प्रिय लगता था।
(07) सामूहिक स्वच्छता _ बात आती है ,सामूहिक स्वच्छता की । यह सबसे महत्वपूर्ण और सर्वोपरि है। जिसे सीमित नहीं बल्कि असंख्य लोग देखते हैं और लाभान्वित होते हैं। यह हमारी सभ्यता का प्रतीक है। हमारी स्वस्थता और प्रसन्नता की गारंटी है। हमारी चहुंमुखी उन्नति और संस्कृति की धरोहर है। हमारी विरासत है। उसका अंग है। इसके लिए जरूरी है कि हम गंदगी युक्त वातावरण, गंदे परिवेश ,गंदगी युक्त गांव ,शहर ,सार्वजनिक स्थानों से मुक्त रहें ।
( 08) गंदगी मुक्त जीवन -स्वस्थ जीवन की कसौटी है ।निरोग जीवन की अवधारणा है । बीमारियों से निजात दिलाती है । इसके लिए हमें निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।
(a) स्वच्छता के प्रति संवेदनशीलता अपने अंदर पैदा करनी है।
( b) कूड़ा करकट का उचित निस्तारण करना चाहिए ।
( c) जैविक और अजैविक कूड़े को अलग-अलग छांट कर उसका निस्तारण करना चाहिए ।
(d) खुले पाखानों से पूर्णता छुटकारा पाना चाहिए।
( e) स्वच्छ जल का उपयोग करना चाहिए तथा जल स्रोतों की स्वच्छता का भी ध्यान रखना चाहिए।
( f) पास पड़ोस का भी ध्यान रखना चाहिए।
( g) सार्वजनिक स्थलों, विद्यालय ,अस्पताल आदि के स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा जन जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।
( h) निर्माण कार्यों में धूल, धुआं ,गंदगी आदि के निवारण के लिए पूर्व में ही कार्य योजना बना देनी चाहिए और सुसंगत प्रयास करने चाहिए ।
( i)सामूहिक भोज, रैलियों ,शादी ब्याह आदि में बचे हुए, पकाए भोजन का उचित निस्तारण करना चाहिए।
( j) डिस्पोजल वस्तुओं का उचित निस्तारण करना जरूरी है ।
(09) कुछ सुझाव :-
A- बच्चों में स्वच्छता के प्रति नैतिक आदत डालनी चाहिए ।
B- जैविक कूड़ा- खेत क्यारी, पिट डालकर खाद के रूप में प्रयुक्त हो सकता है ।
C- अजैविक कूड़ा अलग रखकर वांछित स्थान या वाहन या स्वच्छता कर्मी को सौंपना चाहिए ।
D- कपास, रेशा, टाट आदि के थैलों का प्रयोग करना चाहिए ।
(E) कागज की थैलियों का उपयोग करना चाहिए ।
( F) टूटी- फूटी वस्तुएं ,कबाड़ी को सौंपना चाहिए।
( G) पास पड़ोस का ध्यान रखना चाहिए बच्चों और बुजुर्गों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
( H) एनएसएस, एनसीसी ,स्काउट गाइड्स आदि इकाइयों का भी सहयोग लेना चाहिए ।
(I) निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व स्थल पर पानी का छिड़काव करना चाहिए ।
(J) वेडिंग पॉइंट्स में भोजन बांटने वाले कुछ व्यक्ति नियुक्त होने चाहिए ताकि बच्चे उतना ही भोजन ले जितना वह खा सकें और भोजन का दुरुपयोग भी ना हो बचे हुए बासी भोजन को उचित स्थान में निस्तारण करना चाहिए न कि खुले में डाल देना चाहिए । इससे गंदगी फैलती है। बदबू आती है । बीमारियों का डर भी उत्पन्न होता है।
(K) गांव- शहर में पानी -युक्त स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि यात्रियों को या शहर में आने- जाने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े ।
(10)निष्कर्ष :- अतः सुंदरता से अधिक महत्वपूर्ण स्वच्छता है। इसे निरंतर बनाए रखना हमारा मूल कर्तव्य है।

@कवि : सोमवारी लाल सकलानी, निशांत ।
( ब्रांड एंबेसडर )
नगर पालिका परिषद चंबा ( टिहरी गढ़वाल)
उत्तराखंड।

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