एक व्यंग हैं : पसंद आये तो एक स्माइल दीजियेगा

प्रस्तुति : हर्षमणि बहुगुणा,

जिसने भी लिखा है, बहुत शानदार 👌लिखा👍 है।*

*यह नदियों का मुल्क है,*
*पानी भी भरपूर है।*
*बोतल में बिकता है,*
*बीस रू शुल्क है।*

*यह गरीबों का मुल्क है,*
*जनसंख्या भी भरपूर है।*
*परिवार नियोजन मानते नहीं,*
*जबकि नसबन्दी नि:शुल्क है।*

*यह अजीब मुल्क है,*
*निर्बलों पर हर शुल्क है।*
*अगर आप हों बाहुबली,*
*हर सुविधा नि:शुल्क है।*

*यह अपना ही मुल्क है,*
*कर कुछ सकते नहीं।*
*कह कुछ सकते नहीं,*
*जबकि बोलना नि:शुल्क है।*

*यह शादियों का मुल्क है,*
*दान दहेज भी खूब हैं।*
*शादी करने को पैसा नहीं,*
*जबकि कोर्ट मैरिज नि:शुल्क हैं।*

*यह पर्यटन का मुल्क है,*
*बस/रेलें भी खूब हैं।*
*बिना टिकट पकड़े गए तो,*
*रोटी कपड़ा नि:शुल्क है।*

*यह अजीब मुल्क है,*
*हर जरूरत पर शुल्क है।*
*ढूंढ कर देते हैं लोग,*
*पर सलाह नि:शुल्क है।*

*यह आवाम का मुल्क है,*
*रहकर चुनने का हक है।*
*वोट देने जाते नहीं,*
*जबकि मतदान नि:शुल्क है।*

बेचारा आदमी:

*जब सर के बाल न आये तो* *दवाई ढूँढता है..,*
*जब आ जाते है तो नाई ढूँढता है..,*
*और जब काले रहते हैं तो लुगाई ढूँढता है ।*
*जब सफ़ेद हो जाते है तो फिर डाई ढूँढता है…!*

*मुस्कराईये, मुस्कराहट नि:शुल्क है।

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