खाटूश्याम मंदिर में लाखों के चढ़ावे को लेकर विवाद, मंदिर कमेटी के दो दान पात्रों को जप्त कर जांच शुरू

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खाटूश्याम मंदिर में लाखों के चढ़ावे को लेकर विवाद, देवस्थान मंदिर कमेटी के दो दान पात्रों को जप्त कर जांच शुरू की खाटू श्या्म जी में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में चढ़ने वाले चढ़ावे को लेकर श्री श्याम मंदिर कमेटी के पदाधिकारी पर सवाल उठने लगे हैं। मंदिर परिसर में कितने दानपात्र कहां का लगाए गए हैं इसका हिसाब देवस्थान विभाग के पास नहीं है।

देवस्थान विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से मंदिर कमेटी के पदाधिकारी चढ़ावे आने वाले रुपए की बंदरबांट करने में लगे हुए हैं। नियमों के मुताबिक देवस्थान विभाग की सहमति और निगरानी में मंदिर परिसर में दान पेटियां लगाई जाती है। इन बेटियों पर देवी स्थान और मंदिर कमेटी के ताले भी लगते हैं। हर माह इन दानपात्रों में आने वाले दान की राशि की गणना देवस्थान अधिकारियों की मौजूदगी में की जाती है। लेकिन अब यह नहीं हो रहा है कुछ दान पात्र मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने अपनी मर्जी से लगा दिए हैं और उस में आने वाले दान को खुद अकेले की जीम रहे हैं।

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खाटू श्याम मंदिर में कमेटी के पदाधिकारियों ने गत 14 फरवरी रविवार काे ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियाें ने मंदिर निकास द्वार के पास रखे दाे गल्ले 14 नंबर व 15 नंबर उठवाकर एक कमरे में रखवा दिए। सेवक परिवार के ही कुछ सदस्याें काे इसकी जानकारी लगी कि इन पर सिर्फ ट्रस्ट का ताला है। नियमानुसार देवस्थान विभाग का ताला व सील नहीं है। इन गल्लाें से रुपए निकालने का अंदेशा जताते हुए देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त महेंद्र देवतवाल काे शिकायत की गई।

सहायक आयुक्त देवतवाल ने माैके पर निरीक्षक के साथ टीम भेजी ताे वहां हड़कंप मच गया। टीम ने अंधेरे कमराें से दाेनाें गल्लाें काे बाहर निकलवाया। टीम ने अपना रिकाॅर्ड चैक किया ताे सामने आया कि यह गल्ले उसने रखवाए ही नहीं थे। न ही इन पर विभाग का ताला और सील थी। निरीक्षक ने माैके पर माैजूद कर्मचारियाें से इसकी चाबी मांगी ताे जवाब मिला कि ताले तुड़वा लाे, चाबी नहीं मिल रही। इस पर टीम ने ताले तुड़वाए। दाेनाें गल्लाें पर दुबारा ट्रस्ट और विभाग के ताले लगवाए गए। इसके बादउन पर सील लगाई गई। देवस्थान विभाग की टीम ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए ट्रस्ट काे नाेटिस जारी किया ।

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श्री श्याम मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान दानपात्र नंबर 1, 2, 3, 4,5, 10 और 11 को सील किया था। वहीं 32 नंबर दानपात्र को 27 अगस्त 2020 को सील किया था, इस दौरान श्री श्याम मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने दानपत्र नंबर 14 व 15 को सफाई करने का बहाना कर इन्हें सील नहीं करने दिया था। इसके चलते इन पर देवस्थान विभाग का ताला व सील नहीं लगाई गई थी। सबसे बड़ी बात यह भी है कि इन दानपात्रों को रखने को लेकर भी कमेटी के कर्मचारी झूठ बोलते रहे। एक बड़ा दानपात्र 3 फीट चौड़ा और साढ़े चार फीट ऊंचा है। पूर्व में एक दानपात्र के पूरा भरने के पश्चात में एक बार में करीब 40 से 60 लाख रुपए तक निकलते आए हैं। यह पैसा कमेटी व विभाग के कार्मिकों की निगरानी में गिना जाता है। गल्ले रखने, इनके स्थान का चयन, खाली करने को लेकर देवस्थान विभाग की ओर से पर्याप्त मॉनिटरिंग की भी कोई प्रक्रिया नहीं है। हर खाली दानपात्र पर एक ताला मंदिर कमेटी और एक देवस्थान विभाग की ओर से लगाकर सील किया जाता है। सील की तिथि रजिस्टर में लिखी जाती है। भेंट पात्रों के भरने पर इन्हें सुरक्षित रखा जाता है। इन्हें देवस्थान विभाग के अधिकारियों व कमेटी की मौजूदगी में खोला जाता है।

देवस्थान के सहायक आयुक्त महेंद्र देवतवाल ने कहा कि दो दानपात्र विभाग की सील के बिना ही कमेटी ने मंदिर परिसर में रख दिया था। शिकायत मिलने पर टीम भेजकर कार्रवाई की है। अब दानपात्र देवस्थान विभाग की निगरानी में हैं। ट्रस्ट पदाधिकारियों को नोटिस दिया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।

वहीं दूसरी ओर मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष कालू सिंह ने कहा कि कमेटी अध्यक्ष शंभूसिंह की अनुमति से दो दानपात्र रखवा दिए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि हांयह सही है कि इन पर देवस्थान का ताला नहीं था। दोनों दानपात्रों को चार बार खोलने का आरोप झूठा है। मंदिर परिसर और कमरों में जगह-जगह कैमरे लगे हुए हैं।

देवस्थान के अधिकारियों ने इस मामले में सेवक परिवार के सदस्य महेंद्रसिंह, सावधानसिंह और स्वयंसिंह सहित अन्य का बयान लिया है। उन्होंने बयान दिए हैं कि वर्तमान में श्री श्याम मंदिर कमेटी के पदाधिकारी ट्रस्ट चलाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में इस मंदिर कमेटी को को भंग कर इसे टेंपल बोर्ड बनाया जाए।गौरतलब है कि पूर्ववर्ती सरकार भी खाटूश्यामजी में टेंपल बोर्ड बनाने की घोषणा कर चुकी है। लेकिन बाद में सरकार भूल गई। अब आए दिन यहां चढ़ावे की राशि व आय-व्यय को लेकर शिकायतें व आरोप लगाए जा रहे हैं।

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