शहर स्वच्छता : भाग -05 (सुलभ शौचालय और मोबाइल महिला शौचालय)

शहर स्वच्छता : भाग -05 (सुलभ शौचालय और मोबाइल महिला शौचालय)

चम्बा:  (01) सुलभ शौचालयों का योगदान :- शहर स्वच्छता अभियान के अंतर्गत सुलभ शौचालय और महिला मोबाइल शौचालयों का महत्वपूर्ण योगदान है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत की जाने वाली यह पहल बहुत ही सराहनीय है। नगर पालिका परिषद चंबा के अंतर्गत सुलभ शौचालय और मोबाइल महिला शौचालयों के कारण खुले में शौच से मुक्ति मिली है ।मातृशक्ति का मान बढ़ा है।

चंबा शहर टिहरी गढ़वाल का एक महत्वपूर्ण व्यवसायिक क्षेत्र है। प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या व्यक्ति सौदा पता ,मार्केटिंग और शॉपिंग के लिए आते हैं । नेशनल हाईवे पर होने के कारण अनेकों यात्री यहां पर रुकते हैं। सुलभ शौचालयों के कारण और मोबाइल महिला शौचालय के कारण ग्रामीणों यात्रियों और आने जाने वाले लोगों को काफी सहूलियत मिली है। सुलभ और मोबाइल महिला शौचालयों के न होने के कारण पहले लोगों को टॉयलेट/ प्रसाधन आदि की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था । न चाहते हुए भी उन्हें खुले में शौच आदि के लिए या टॉयलेट के लिए जाना पड़ता था। गंदगी के अलावा कई बार लज्जित होने की भी समस्या आ जाती थी लेकिन इस पहल के कारण इन सब बातों से छुटकारा मिल चुका है।
( 02) चंपारण अभियान :- शहर में निर्मित इन सुलभ शौचालय और महिला मोबाइल शौचालयों के कारण मुझे गांधी जी के चंपारण आंदोलन के दौरान बिहार में किए गए स्वच्छता अभियान की याद आ जाती है। जिसके लिए उन्होंने कस्तूरबा जी को इस कार्य के लिए निर्देशित किया था । गांधी जी के निर्देशों का पालन करते हुए कस्तूरबा जी ने स्थानीय महिलाओं से बातचीत की। उनको समझाया और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनके के जीवन स्तर को भी ऊंचा उठाने का कार्य किया । कस्तूरबा जी ने मनोयोग से या कार्य किया । लोगों को समझाया कि खुले में शौच के कारण अनेक प्रकार की बीमारियों की संभावना बनी रहती है जिस कारण हैजा, डायरिया ,चर्म रोग आदि अनेक प्रकार की बीमारियों से रू ब रू होना पड़ता था। इसके अलावा गांधी जी ने अपने आश्रम सेवाग्राम में भी खुले पाखनों के निराकरण के लिए छोटे-छोटे पिट खुदबाए। जब वे पिट भर जाते थे और बदबू देने लगते थे तो उनके स्थान पर नए पिट बनाए जाते थे। पुराने पिटों की निकासी करके सडे मल को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और पुन: उन्हें निर्मित किया जाता था।
( 03) अभियान का हिस्सा बनें :- नगर पालिका परिषद चम्बा अस्तित्व में आने से पहले स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा बसायत होने के फलस्वरूप एक गांव का आकार इसने लिया। यद्यपियह कभी गांव नहीं था। कालांतर पर नगर पंचायत बनी और आज नगर पालिका परिषद विद्यमान है ।आज चंबा की आबादी 20000 से ऊपर है । यदि हम यह मानकर चलें स्वच्छता कर्मचारी पूरे शहर की स्वच्छता का बेड़ा उठाएं और स्वच्छता का निराकरण करें , असंभव है । यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बनता है कि अपने परिवेश को स्वच्छ रखें। कूड़ा निस्तारण में मदद करें। समग्र स्वच्छता अभियान के भागीदार बने। मात्र 23 स्वच्छता कर्मियों के भरोसे हम स्वच्छता की परिकल्पना करें तो यह संभव नहीं है ।
(04)पूर्व अध्यक्षों के प्रयास :- चंबा शहर के सौंदर्यीकरण और स्वच्छ बनाने में सदैव प्रयास किए जाते रहे हैं। नगर पालिका परिषद चंबा से पूर्व नगर पंचायत के निवर्तमान अध्यक्षों के द्वारा समय-समय पर पहल की गई। जिनमें श्री पीयूष उनियाल तथा श्री सूरज राणा जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है ।बाद के समय में स्वच्छता के मामले में श्री विक्रम पंवार के द्वारा भी अच्छा कार्य किया गया जो आज भी गतिमान है।
(05)काफी अंतर आया :- चंबा एक स्वत स्फूर्त कस्बा है। चार दशकों में इसका काफी विकास हुआ। पुरानी टिहरी के अवसान के बाद लोगों ने यहां पर बसायत की। अपने आशियाने बनाए। रोजगार के लिए स्थानीय लोगों ने यहां पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाएं। दूरदराज के क्षेत्र के लोगों ने यहां पर रहना पसंद किया ।किसी ने स्वास्थ्य की सुविधाओं के कारण, तो किसी ने बच्चों को पढ़ाने के नाम पर ,चंबा को अपना स्थाई/ अस्थाई निवास बनाया।
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर होने के कारण तथा ठंडी जलवायु का क्षेत्र होने के कारण पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को यह स्थान काफी रास आया । धीरे-धीरे यह एक छोटा सा क्षेत्र नगर पालिका परिषद में तब्दील हो गया। जिस प्रकार से शहर की जनसंख्या बढ़ी है उसके अनुसार सुविधाओं की कमी रही लेकिन जनप्रतिनिधियों के प्रयास के कारण काफी हद तक इन समस्याओं का निजात हुआ। शहर स्वच्छता का प्रयास भी इसी कड़ी का एक अंग है ।चंबा शहर के स्वच्छता में प्रत्येक नागरिक से लेकर, व्यापारी वर्ग संवेदनशील है। कमोबेश इसकी स्वच्छता के लिए प्रयासरत रहता है।
(06) व्यापार मंडल की भूमिका :- नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत से पूर्व चंबा में व्यापार सभा रही है। जो आज उद्योग व्यापार मंडल के नाम से जानी जाती है। व्यापार मंडल के वर्तमान अध्यक्ष श्री दर्मियान सिंह सजवान, जो कि एक पूर्व सैनिक है। एक जागरूक व्यक्ति हैं । शहर स्वच्छता अभियान के रूप में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं ।अपने स्तर से अपने संगठन को समझाते हैं । अपना नैतिक दायित्व समझते हैं । मेरा मानना है कि सैनिक स्वच्छ जीवन पसंद करते हैं। सैनिक पुत्र होने के नाते बखूबी समझता हूं। सैनिकों की स्वच्छता का हम भी अनुकरण करते हैं। चंबा में अनेक स्वैच्छिक संस्थाएं इस अभियान का हिस्सा हैं। नगर पालिका परिषद के सभासदों के साथ-साथ स्वैच्छिक संगठन 24 ,पूर्व सैनिक संगठन, सामुदायिक रेडियो तथा हेंवल वाणी डिजिटल मीडिया की भूमिका भी सराहनीय है ।
( 07) सराहनीय प्रयास :- वर्तमान में नगर पालिका परिषद की सम्मानित अध्यक्ष श्रीमती सुमन रमोला, जो कि स्वयं एक महिला है। महिलाओं के सुविधाओं के लिए काफी संवेदनशील है। सौभाग्य से नगर पालिका परिषद को एक सुयोग्य अधिशासी अधिकारी मिलने के कारण शहर स्वच्छता में आमूलचूल परिवर्तन हुआ ।उत्तराखंड में चंबा को स्वच्छता के लिए पुरस्कृत भी किया गया। अधिशासी अधिकारी श्री शांति प्रसाद जोशी स्वच्छता ,कूड़ा निस्तारण, शहरी विकास और नागरिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अपने विशद अनुभवों का प्रयोग करते हैं । जन सहयोग लेते हैं और समस्याओं का निराकरण के करते हैं।
(07)चार दशक पूर्व का चंबा :- चार- पांच दशक पूर्व अज्ञानता ,अशिक्षा ,गरीबी के कारण भी स्वच्छता प्रभावित हुई । खुले शौच का प्रावधान था । किसी भी गांव या शहर में प्रवेश करते ही वक्त गंदगी के अंबार नजर आते थे। जिसके कारण बरसात के समय में अनेक प्रकार की असाध्य बीमारियां उत्पन्न हो जाती थी । जन स्वास्थ्य प्रभावित होता था। लेकिन जागरूकता बढ़ने के कारण टॉयलेट और प्रशाधन की व्यवस्था होने के कारण फ्लैश लेट्रन आने के बाद, सुलभ शौचालय और महिला मोबाइल शौचालयों के होने के कारण, गांव -शहर में गंदगी से छुटकारा पाया। उस दौरान मजबूरी में लोग गंदगी फैलाते थे। यदि इस युग में भी कोई गंदगी फैलाता है तो वह लापरवाही मानी जाएगी न की मजबूरी ।
(08) धर्म का सहारा :- स्वच्छता के मामले में हमारे धर्म का धर्मों का बड़ा योगदान रहा है ।अनुशासन बनाने के लिए या जीवन को बचाने के लिए धर्म का सहारा लिया गया। किसी भी सार्वजनिक स्थान ,घर के अंदर ,मंदिर परिसर में ,विद्यालय के कक्षा कक्षों में, प्रवेश करने से पूर्व बूट और चप्पल बाहर निकाल लेते थे। पैरों को प्रक्षालित करके अंदर आते थे ताकि गंदगी घर में प्रवेश न कर सके।
मनुष्य के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है ।शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं। इसके साथ साथ उपभोग वाद के बढ़ जाने के कारण, कूड़ा- करकट, जनसंख्या बढ़ने के कारण गंदगी आदि का बढ़ना भी लाजमी है।
हम प्लास्टिक मुक्त भारत की कल्पना करते हैं ।एक दिन यह कल्पना फलीभूत होगी। कुछ समय पूर्व पॉलिथीन थैलियों के प्रति भी इसी प्रकार की जागरूकता बनी । आज मुश्किल से ही या कम मात्रा में ही वो थैलियां दिखाई देती है ।
( 09) पूर्व सैनिकों की भूमिका :- चंबा शहर सैनिक बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण पूर्व सैनिकों का भी काफी योगदान है। पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष श्री इंदर सिंह नेगी प्रत्येक राष्ट्रीय पर्व पर वीर सैनिकों के शहीद स्मारकों को अपने हाथों से स्वच्छ करते हैं । शासन -प्रशासन से मांग करते हैं और उनकी इस पहल में बुद्धिजीवी वर्ग भी साथ देता है और मीडिया भी।
( 10) स्वच्छता को कर्तव्य मानें :- स्वच्छ जीवन जीना हमारा नैतिक अधिकार है । इसके लिए हमें अपने कर्तव्यों को निष्ठा पूर्वक पालन करना जरूरी है। हमें बड़ों के बातों का आदर करना चाहिए ।प्रशासन के बातों और नियमों का पालन करना चाहिए । जैविक और अजैविक कूड़े को अलग रखना चाहिए। टॉयलेट /शौच आदि का प्रयोग निश्चित स्थान पर जाकर ही करना चाहिए जहां पर किया सुविधा प्राप्त हो। लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए । इसी से हम बीमारियों से बचे रहेंगे ।हम स्वस्थ और सुंदर रहेंगे। हमारा मान और सम्मान भी बढ़ेगा। शहर स्वच्छता बढ़ेगी और अपना चंबा शहर स्वच्छता के मामले में एक दिन मसूरी, शिमला, नैनीताल ,आदि को भी पीछे छोड़ देगा। ऐसा मेरा मानना है।
(11) प्रयास जारी है :- कुछ वर्षों पूर्व शहर का कचरा पुरानी टिहरी रोड स्थित डंपिंग स्थल पर डाला जाता था। जिसके कारण आना- जाना काफी दूभर हो गया था। स्कूल के बच्चे उनके अभिभावक यात्री उस गंदगी से रू ब रू होते थे लेकिन काफी हद तक उस समस्या का भी निराकरण किया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण में डंपिंग की समस्या सबसे ज्यादा आडे आती है। तरह-तरह के अडचनें सामने आती है। कभी-कभी विरोध का सामना भी करना पड़ता है। फिर भी जन- सहयोग के द्वारा इस समस्या का निराकरण होता है। कोई न कोई विकल्प तलाशा जाता है। जैसे कभी अजैविक कूड़े कोई एकत्रित कर रीसाइक्लिंग प्लांट में भेजा जाता है। कभी सड़कों के निर्माण में लेयर के रूप में इसका इस्तेमाल होता है ।अन्य प्रयास भी किए जाते हैं।
(12) संवेदनशीलता जरूरी :- इस संदर्भ में मेरा यह मानना है कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है। हमारे अंदर मानवीय संवेदनाएं होनी चाहिए। जीवन के प्रति जागरूकता ,स्वच्छता के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है।
इसी के द्वारा हम स्वच्छ शहर के परिकल्पना कर सकते हैं। और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत गांधीजी के चश्मा वाला लोगो का भी मान रख सकते हैं ।

@कवि: सोमवारी लाल सकलानी ,निशांत ।
(ब्रांड एंबेसडर)
नगर पालिका परिषद चंबा, टिहरी गढ़वाल।

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