ये ज़िन्दगी है यहां दर्द छुपा कर भी मुस्कुराना पड़ता है

प्रस्तुति: हर्षमणि बहुगुणा,

ये ज़िन्दगी है, यहां दर्द छुपा कर भी

मुस्कुराना पड़ता है ।

यहां शरीफ़ लोगों को जीने कहां देते हैं ।

कभी – कभी बुरा भी बन जाना पड़ता है ।

 झूठ भी बोलना पड़ता है ,

सच भी छुपाना पड़ता है ,

जिन्दगी जीने के लिए,

हर रास्ता अपनाना पड़ता है ,

खामोशियां बेवजह नहीं होती –

कुछ दर्द, आवाज छीन लिया करती हैं –

 दिल तो रोज कहता है कि,

मुझे कोई सहारा चाहिए ,

फिर दिमाग कहता है क्यों ?

क्या ? तुम्हें धोखा दुबारा चाहिए-

परन्तु यह दुनिया बड़ी विचित्र है, कुछ कहती है तो कुछ करती है । कुछ लोग कहते हैं कि मैंने कभी हार नहीं मानी तो कुछ कभी जीतना ही नहीं चाहते हैं ।

फिर भी ईश्वर पर विश्वास रखियेगा, नेकी कर कुयें में डाल, कर भला तो हो भला। अंत……..I

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