धनतेरस आज सायं छः बजे तक है

प्रस्तुतिः हर्षमणि बहुगुणा,
आज धनतेरस सायं छः बजे तक है, उसके बाद नरक चतुर्दशी है। सायं छः बजे से पूर्व यम की प्रसन्नता के लिए दक्षिणाभिमुखी दीपक जलाकर यह मंत्र पढ़ें।

*मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह* ।
*त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीयतामिति* ।।

फिर रात्रि में नरक चतुर्दशी को मनाने के लिए यम के चौदह नामों से तीन तीन अंजलि जल दान करने से वर्ष भर के पाप नष्ट होते हैं । या अपने लोकाचार के अनुसार पूजन – जप आदि किया जा सकता है । कल अर्थात चौदह नवंबर को “दीपावली” का पर्व है, यह पर्व सुख – समृद्धि , उन्नति , अन्त करण की शुद्धता व पवित्रता, सुयश एवं सफलता , घर आंगन की ही नहीं अपितु मन को भी स्वच्छ व निर्मल बनाने की आवश्यकता है इस प्रकार की ( छल-कपट रहित ) प्रेरणाओं से मन को ओत-प्रोत बनाने का पर्व है । इस पर्व से अज्ञानता के अंधकार का बन्धन निश्चित रूप से कटेगा ही और विश्व का हर व्यक्ति ईश्वरीय कृपा का पात्र बन कर एक आल्हादित मन धारण कर समाज में परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बन सकेगा।

दीपावली वाह्य अंधकार को ही नहीं मिटाती अपितु मानसिक अज्ञानता को भी दूर करती है। व्यक्ति ईश्वर से नजदीकी प्राप्त करता है और यही जीवन का लक्ष्य भी है । हम प्रार्थना करें कि परमात्मा हमें हमारे कार्य- व्यवसाय में हमेशा प्रगति और उन्नति की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा प्रदान करने की कृपा करें , जिससे हम बुराईयों को त्यागकर अच्छाइयों को ग्रहण कर इस आत्मा को जीवन जीने की शक्ति प्राप्त करने का सुअवसर प्रदान करने का प्रयास कर सकेंगे।

उजाले का पर्व दीपावली हम सबके लिए मंगलमय व कल्याणकारी हो, भगवान का स्नेह सदैव हम सबके साथ रहे , यही शुभकामना करते हुए प्रभु राम के श्री चरणों में विश्व बंधुत्व की भावना करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं , जिनके आदर्श से आज हमें यह पर्व मिला है । इस प्रार्थना के साथ-

*त्वं ज्योतिस्त्वं रविश्चन्द्रो विद्युदग्निश्च तारका:।
*सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः।

*आलोक पर्व की हार्दिक बधाई।

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