राजकीय महाविद्यालय रायपुर को 4 जी कनेक्टिविटि की सौगात

देहरादून: महाविद्यालय रायपुर को उच्च शिक्षा, सहकारिता, दुग्ध विकास एवं प्रोटोकॉल (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने 4 जी कनेक्टिविटी की सौगात दी। महाविद्यालय में आयोजित एक समारोह में उन्होंने आज विधिवत 4 जी नेटवर्क सुविधा का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय को स्मार्ट क्लास, कम्प्यूटर पुस्तकालय सहित विभाग द्वारा निर्धारित सभी 14 बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध की जायेंगी।

4 जी सुविधा से जुड़े राज्य के 43 राजकीय महाविद्यालय राजकीय

बतौर मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग की पहल पर संचालित राज्य सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना में एक 4 – जी कनेक्टीविटी से अब तक प्रदेश के 43 राजकीय महाविद्यालय को जोड़ा जा चुका है। जबकि आगामी 15 दिसम्बर तक राज्य के सभी 105 राजकीय महाविद्यालयों एवं सरकारी विश्वविद्यालयों को इस सुविधा का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में आज राजकीय महाविद्यालय रायपुर देहरादून में 4 जी नेटवर्क सुविधा का विधिवत शुभारम्भ हो गया।

राजकीय महाविद्यालय रायपुर को 4 जी कनेक्टिविटि की सौगात

राजकीय महाविद्यालय रायपुर को 4 जी कनेक्टिविटि की सौगात

इस मौके पर डॉ. रावत ने कहा कि महाविद्यालय को 04 स्मार्ट क्लास, 15 कम्प्यूटर पांच सीसीटीवी कैमरे, पुस्तकालय हेतु किताबें, सौर ऊर्जा प्लांट सहित सभी 14 बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की घोषणा की। जबकि अगले सत्र में महाविद्यालय हेतु एक कॉमन हॉल देने की बात कही।

तीन वर्ष के कार्यकाल में उच्च शिक्षा विभाग ने नए आयाम स्थापित किये: उमेश शर्मा काऊ

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय विधायक उमेश शर्मा काऊ ने कहा कि पिछले तीन वर्ष के कार्यकाल में उच्च शिक्षा विभाग ने नए आयाम स्थापित किये। जिसका श्रेय विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को जाता है। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतपाल सिंह सहानी मुख्य सहित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के विभिन्न समस्यों से अवगत कराया।

इस मौके पर विशेष अतिथि शमशेर सिंह पुण्डीर, जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा पी के पाठक, नोडल अधिकारी रूसा डॉ ए. एस. उनियाल, नोडल एडुसेट डॉ. विनोद कुमार,  प्रो. मधु नोटियाल एवं महाविद्यालय के शिक्षक एवं समस्त स्टॉफ उपस्थिति रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ पी. के. कुकरेती ने किया।

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