मिशन 2022: टिहरी में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकती है उजएपा

Editor Sarhad Ka Sakshi

केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’

उत्तराखण्ड जन एकता पार्टी आगामी 2022 के चुनावों को लेकर जहां जनपद में सक्रिय होकर घर-घर अपनी पैठ बनाने में जुटी है, उस हिसाब से लगता है कि मिशन 2022 में भाजपा की मुश्किलें कम नहीं हो पाएंगी। पूर्व से ही भाजपा के गढ़ माने जाने वाले साबली गांव में आज न्यूट पोर्टलों की सुर्खियों के अनुसार लगभग 108 लोगों ने साबली में उजएपा का दामन थामा। हालांकि प्रमुख समाजसेवी सुशील बहुगुणा भी आज अपने समर्थकों समेत भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए, मगर इधर कुछ लोगों का भाजपा में शामिल होना और दूसरी तरफ साबली के ही लोगों का उजपा का दामन थामना, इसमें कुछ संशय तो प्रतीत होता ही है। एक ही गांव से एक ही दिन दोनों दलों का ग्राफ बढ़ना, किसी न किसी दल को तो नुकसानदेय होगा ही। 

टिहरी जनपद में 30 हजार सदस्य का लक्ष्य हासिल करेंगे 

उत्तराखण्ड जन एकता पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष का यह कहना कि हम टिहरी जनपद में 30 हजार सदस्य का लक्ष्य हासिल करेंगे और आज जो लोग साबली गांव से उजपा में शामिल हुए हैं, उनमें से सर्वाधिक नाम पहले भाजपा से जुडे़ हुए थे। हालांकि सुशील बहुगुणा समर्थकों समेत भाजपा में आये, श्री बहुगुणा गत विधान सभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी धन सिंह नेगी के खिलाफ ही निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ चुके हैं और अब भाजपा के खेमे में आ चुके हैं। मगर उजपा में जाने वाले लोगों में भी कुछ भाजपा के ही लोग प्रतीत होते हैं। हो सकता है यह भाजपा से असंतुष्ट रहे हों, जिस कारण इन्होंने उपएपा के केन्द्रीय अध्यक्ष दिनेश धनै पर विश्वास जताया।

यदि उजएपा का जिले में इसी प्रकार गहन सम्पर्क अभियान चलता रहा और भाजपा का नाराज खेमा उससे जुड़ता रहा तो यह नुकसान किसे होगा? इसका अनुमान लगाया जा सकता है, यूं भी उजएपा में सर्वाधिक वहीं लोग जुड़े हैं, जो पूर्व में भाजपा के निष्ठावान एवं कर्तव्यपरायण कार्यकर्ताओं में से थे। चाहे रागिनी भट्ट हों या कोई और? भारतीय जनता पार्टी संगठन के लिए अभी सूझ-बूझ से कार्य करने का वक्त है, यदि इसी प्रकार उजएपा का ग्राफ बढ़ता रहा और भाजपा संगठन दोहरी सत्ता के मद में अपनी कुम्भकर्णी नींद से नहीं जागा, तो मिशन- 2022 की राह का भाजपा को स्वयं आकलन करना होगा! इस प्रकार एक नवोदित दल टिहरी जनपद में अपने लक्ष्य के अनुरूप भाजपा की मुश्किलें ही बढ़ाएगा, राह आसान नहीं होगी। अब यह तो सोचना भाजपा संगठन का है कि वह अपना ऊॅंट किस करवट बिठाती है।  

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