‌‌महाविद्यालय, मजरा महादेव में ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ के अंतर्गत ”गंगा स्वछता पखवाड़ा” में ‘गंगा स्वच्छता शपथ’ व ‘भाषण प्रतियोगिता’

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‌‌महाविद्यालय, मजरा महादेव में 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' के अंतर्गत ''गंगा स्वछता पखवाड़ा
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‌‌महाविद्यालय, मजरा महादेव में ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ के अंतर्गत ”गंगा स्वछता पखवाड़ा” में ‘गंगा स्वच्छता शपथ’ व ‘भाषण प्रतियोगिता’

पौड़ी: राजकीय महाविद्यालय, मजरा महादेव, पौड़ी (गढ़वाल) में ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ ‘जल शक्ति मंत्रालय’ भारत सरकार के तत्त्वाधान में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 16 मार्च से 31 मार्च तक ”गंगा स्वछता पखवाड़ा” में ‘गंगा स्वच्छता शपथ’ व ‘भाषण प्रतियोगिता’ के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. के. सी. दुद्पुड़ी ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि नमामि गंगे परियोजना की शुरुआत गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने तथा गंगा नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से की गई थी। युवाओं और जनता की भागीदारी के माध्यम से एक गंगा नदी के प्रदूषण और संरक्षण की दिशा में योगदान देना और दूसरी ओर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना ही इसका लक्ष्य है।

मंच का संचालन करते हुए नमामि गंगे के नोडल अधिकारी डॉ. चन्द्र बल्लभ नैनवाल ने कहा कि गंगा नदी भारत की राष्ट्रीय नदी है। इस नदी को भारतवासी सबसे पवित्र मानते हैं। गंगा नदी भारत की सबसे लंबी नदी है, इसकी लंबाई 2,525 किलोमीटर है। गंगा उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है।

गंगा नदी को पर्यावरण मंत्रालय ने सबसे अधिक प्रदूषित और खतरे में वाली नदी घोषित किया था। गंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए ही नमामि गंगे कार्यक्रम किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य –

प्रदूषण की प्रभाव को कम करना और नदी का संरक्षण सुनिश्चित करना।

कचरे को नदी में जाने से रोकने के लिए ठोस कदम व अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना।

नदी के किनारे वृक्षारोपण और जैव विविधता संरक्षण करना।

सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना और गंगा नदी के महत्त्व के बारे में जागरूकता पैदा करना इसका मुख्य उद्देश्य हैं।

भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान करिश्मा ( बी.ए द्वितीय सेमेस्टर ), द्वितीय स्थान शिवानी चौहान (बी. ए. चतुर्थ सेमेस्टर), तृतीय स्थान (बी.ए. तृतीय वर्ष) की छात्रा दीपा ने प्राप्त किया।

महाविद्यालय के प्राध्यापकों में आदित्य शर्मा,इंद्रपाल सिंह रावत, डॉ दीपक कुमार, डॉ प्रियंका भट्ट के साथ-साथ शिक्षणेतर कर्मचारी उदयराम पंत, विक्रम सिंह रावत, वीरेन्द्र सिंह, गुलाब सिंह , मनोज रावत ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

महाविद्यालय के छात्र- छात्राओं ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रतिभाग किया।

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