महाविद्यालय पोखरी में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई गई

महाविद्यालय पोखरी में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई गई
महाविद्यालय पोखरी में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई गई
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राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम आयोजित

महाविद्यालय पोखरी में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई गई। राजकीय महाविद्यालय पोखरी (क्वीली) टिहरी गढ़वाल की राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत भारत सरकार के दिशा निर्देश और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) व अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (AICTE) की सराहनीय पहल के चलते 15 नवम्बर को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाया गया।

सरहद का साक्षी, नरेन्द्र बिजलवाण @पोखरी क्वीली 

इस अवसर पर एनएसएस अधिकारी और प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर राम भरोसे ने बताया कि इस वर्ष “जनजातीय गौरव दिवस” स्वतंत्रता आंदोलन के वीर योद्धा ‘राष्ट्रीय चेतना’ के प्रबल संवाहक तथा ‘जल, जंगल व जमीन’ के सजग प्रहरी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवम्बर के अवसर पर पूरे देश में मनाया जा रहा है, जिससे हमारी युवा पीढ़ी को उनके बलिदान के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके, इसी के तहत आज अपने महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर डॉ० राम भरोसे द्वारा महाविद्यालय के समस्त बच्चों को वीर शहीद बिरसा मुंडा के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि बिरसा मुण्डा का जन्म 15 नवम्बर 1875 के दशक में छोटा किसान के गरीब परिवार में हुआ था। मुण्डा एक जनजातीय समूह था जो छोटा नागपुर पठार (झारखण्ड) निवासी था। बिरसा जी को 1900 में आदिवासी लोंगो को संगठित देखकर ब्रिटिश सरकार ने आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया तथा उन्हें 2 साल का दण्ड दिया।

इनका जन्म मुंडा जनजाति के गरीब परिवार में पिता-सुगना पुर्ती(मुंडा) और माता-करमी पुर्ती (मुंडाईन) के सुपुत्र बिरसा पुर्ती (मुंडा) का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखण्ड के खुटी जिले के उलीहातु गाँव में हुआ था। जो निषाद परिवार से थे, साल्गा गाँव में प्रारम्भिक पढाई के बाद इन्होंने चाईबासा जी0ई0एल0 चार्च (गोस्नर एवंजिलकल लुथार) विधालय में पढ़ाई किये थे। इनका मन हमेशा अपने समाज लगा रहता था। ब्रिटिश शासकों द्वारा की गयी बुरी दशा पर सोचते रहते थे। उन्होंने मुंडा लोगों को अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिये अपना नेतृत्व प्रदान किया। 1894 में मानसून के छोटा नागपुर पठार, छोटानागपुर में असफल होने के कारण भयंकर अकाल और महामारी फैली हुई थी। बिरसा ने पूरे मनोयोग से अपने लोगों की सेवा की।

1 अक्टूबर 1894 को नौजवान नेता के रूप में सभी मुंडाओं को एकत्र कर इन्होंने अंग्रेजो से लगान (कर) माफी के लिये आन्दोलन किया। 1895 में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। लेकिन बिरसा और उसके शिष्यों ने क्षेत्र की अकाल पीड़ित जनता की सहायता करने की ठान रखी थी और जिससे उन्होंने अपने जीवन काल में ही एक महापुरुष का दर्जा पाया। उन्हें उस इलाके के लोग “धरती आबा” के नाम से पुकारा और पूजा करते थे। उनके प्रभाव की वृद्धि के बाद पूरे इलाके के मुंडाओं में संगठित होने की चेतना जागी।
1897 से 1900 के बीच मुंडाओं और अंग्रेज सिपाहियों के बीच युद्ध होते रहे और बिरसा और उसके चाहने वाले लोगों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। अगस्त 1897 में बिरसा और उसके चार सौ सिपाहियों ने तीर कमानों से लैस होकर खूँटी थाने पर धावा बोला। 1898 में तांगा नदी के किनारे मुंडाओं की भिड़ंत अंग्रेज सेनाओं से हुई जिसमें पहले तो अंग्रेजी सेना हार गयी लेकिन बाद में इसके बदले उस इलाके के बहुत से आदिवासी नेताओं की गिरफ़्तारियाँ हुईं।

जनवरी 1900 डोम्बरी पहाड़ पर एक और संघर्ष हुआ था, जिसमें बहुत सी औरतें व बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। बाद में बिरसा के कुछ शिष्यों की गिरफ़्तारियाँ भी हुईं। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर के जमकोपाई जंगल से अंग्रेजों द्वारा गिरफ़्तार कर लिया गया। बिरसा ने अपनी अन्तिम साँसें 9 जून 1900 ई को आंग्रेजों द्वारा जहर देकर मर गया। 1900 को राँची कारागार में लीं। आज भी बिहार, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में बिरसा मुण्डा को भगवान की तरह पूजा जाता है।

इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक साथी डॉ० सरिता देवी, डॉ० विवेकानंद भट्ट, डॉ० सुमिता पंवार, डॉ० बंदना सेमवाल, डॉ० मुकेश सेमवाल ग़ैर-शिक्षक साथी श्रीमती रचना राणा, श्रीमती रेखा नेगी, अंकित, नरेंद्र बिजल्वाण, नरेश, दीवान, सुनीता, मूर्ति लाल, राजेंद्र और स्वयंसेवी अंजलि, प्रियंका, काजल, मनीषा, अंजलि, किरणदीप, मनीष, ऋतु, दीपिका, शिवानी, निकिता, कुसुम, प्रियांशी, निकिता आदि उपस्थित रहें।

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