पर्यावरण सुरक्षा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक आंदोलन के आधार स्तंभों में एक: श्री दयाल भाई

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पर्यावरण सुरक्षा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक आंदोलन के आधार स्तंभों में एक: श्री दयाल भाई
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पर्यावरण सुरक्षा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक आंदोलन के आधार स्तंभ

पर्यावरण सुरक्षा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक आंदोलन के आधार स्तंभों में एक थे दयाल भाई,  श्री दीपक तिवारी सुपुत्र स्व. भैरव दत्त तिवारी के व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर आदरणीय दयाल भाई से मुलाकात हुई। यह सुखद आश्चर्य भी है। श्री दयाल भाई 80 वर्ष से ऊपर की उम्र के व्यक्ति हैं लेकिन आज भी युवाओं जैसा जोश, सामर्थ और जीवटता उनके अंदर है।

@कवि : सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’

70 और 80 के दशक में श्री दयाल भाई, चिपको आंदोलन के आधार स्तंभ रहे। स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा, श्री धूम सिंह नेगी, स्वर्गीय श्री कुंवर प्रसून, आलोक प्रभाकर, स्व. प्रताप शिखर, श्री विजय जड़धारी,स्वर्गीय गंगा प्रसाद बहुगुणा, श्री कुंवर सिंह सज्वाण, श्रीमती बचनी देवी, सुदेशा बहन आदि के साथ मिलकर के प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन से लेकर जन-आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई।

श्री दयाल भाई सर्वोदय समाज से भी जुड़े हुए हैं और आज भी एक सच्चे सर्वोदयी की तरह कार्य करते हैं। टिहरी जनपद स्थित नरेंद्र नगर प्रखंड के पाली गांव मे आपका जन्म हुआ। संपूर्ण जीवन समाज सेवा में व्यतीत किया। अनेक परिस्थितियों से जूझना पड़ा लेकिन अपनी विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया।

श्री दयाल भाई जी खनन विरोधी आंदोलन, चिपको आंदोलन, नशा मुक्ति आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे और आज भी वही जुनून उनके अंदर है। उनके नतीजे श्री राजेंद्र भंडारी, ब्लॉक प्रमुख तथा जुझारू राजनीतिज्ञ के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। अनेकों बार उनके घर पर भी बैठने का अवसर मिला यह सब दयाल भाई के कारण ही है।

आज दयाल भाई से 01 घंटे तक अतीत से आधुनांत तक की बातों का स्मरण हो आया। वर्तमान परिस्थितियों के कारण काफी दुखी दिखाई दिए। उन्हें इस बात का खेद है कि लोग अपनी विचारधारा से विमुख होते जा रहे हैं। अवसरवादिता और अर्थोपार्जन लोगों का ध्येय बन चुका है और अब सामाजिक कार्यों के प्रति दिलचस्पी लोगों के मन में नहीं दिखाई देती है। नव युवकों के पास भी अब उत्साह नहीं रहा।

कहा कि राजनीति में सत्ता परिवर्तन होता है। राजनीतिज्ञ अपने फायदे के लिए राजनीति करते हैं। फिर भी पुराने समय में राजनीति में भी वसूल होते थे और अपनी विचारधारा से विमुख नहीं होते थे। दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि श्री मनीष सिसोदिया ने क्या किया? क्या नहीं किया? इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है और ना ही इस पर वह चर्चा कर सकते हैं लेकिन इतना जरूरी है शिक्षा जैसे पवित्र विभाग के मंत्री होने के साथ-साथ उन्होंने आबकारी मंत्रालय क्यों लिया? यदि शिक्षा के साथ स्वास्थ्य विभाग का मंत्रालय भी होता तो जनता में भी एक अच्छा मैसेज जाता लेकिन शिक्षा और आबकारी मंत्री होना समझ से परे है।

इसका एक ही कारण हो सकता है कि शराब मंत्री होने के कारण अधिक से अधिक भौतिक ऐश्वर्य प्राप्त करना। श्री सिसोदिया ने शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली में अच्छा कार्य किया। शराब मंत्रालय मिल जाने के बाद सारा गुड -गोबर हो गया और उनके किए पर पानी फिर गया जो कि एक दुखद पहलू है। आज के युवा भी अवसरवाद की चपेट में हैं।

आंदोलन पहले के समय समाज सुधार, त्याग और बलिदान के लिए होते थे लेकिन आज के आंदोलन व्यक्तिगत स्वार्थ यानी स्वार्थों पर आधारित हैं। उन्होंने अपने आंदोलन के जीवन के अनेक संस्मरण सुनाए कि किस प्रकार उन्होंने वन माफिया, खनन माफिया और शराब माफिया को क्षेत्र से भगा दिया था जिसके कारण शासन को भी झुकना पड़ा और चिपको आंदोलन तो विश्व प्रसिद्ध मिसाल बना। उस समय के कार्यकर्ताओं में एक जुनून था और व्यक्तिगत स्वार्थों की को महत्व नहीं दिया जाता था

बल्कि सभी सार्वजनिक हित के कार्य होते थे और सामाजिक धर्म निभाना तो सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। यदि व्यक्ति के अंदर सामाजिकता नहीं है तो व्यक्ति पशु के समान है और इसी पशु प्रवृति में उसका अंत भी हो जाता है। हमेशा इतिहास उन लोगों का बनता है जो परहित और परमार्थ के लिए कार्य करते हैं।

श्री दयाल भाई को इस बात की खुशी है कि सामंतवादी व्यवस्था के ताबूत पर कील ठोकने वाले श्रीदेव सुमन जी का बलिदान राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और आप (मैं) चंबा की सुमन कॉलोनी में रहता हूं। श्री दयाल भाई मेरे ननिहाल से भी हैं और लंबे समय से उनसे अनेकों बैठकों, गोष्ठियों, कार्यशाला में भेंट होती है। आंदोलनों के इतिहास में केवल खुरेत- पुजाल्डी के वन माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन में सर्वप्रथम उनसे रू-ब-रू हुआ था। तब मैं एक स्कूली छात्र था और दयाल भाई एक परिपक्व सामाजिक और चिपको आंदोलनकारी। मै दयाल भाई के शतायु होने की ईश्वर से कामना करता हूं। नव संवत्सर तथा नवरात्र के अवसर पर उनके महान व्यक्तित्व को नमन करता हूं।

(कवि कुटीर)
सुमन कोलोनी चंबा, टिहरी गढ़वाल।

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