पत्रकार के पुश्तैनी मकान के ऊपर गिरा विशालकाय खड़क का पेड़

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पत्रकार के पुश्तैनी मकान के ऊपर गिरा विशालकाय खड़क का पेड़

 संपूर्ण परिवार रहता है इस पुश्तैनी मकान में, मकान को हुआ काफी नुकसान

शासन- प्रशासन से गुजारिश, कि कलम के सिपाही की आर्थिक मदद की जाए, कर सकें अपने पुश्तैनी मकान का पुनर्निर्माण

कवि:सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’

विकासखंड चंबा के छाती महादेव (मखलोगी) टिहरी गढवाल में पत्रकार केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’ के मकान के ऊपर विशालकाय खड़क का पेड़ गिर जाने से जहां एक और उनका पुश्तैनी मकान ध्वस्त हुआ है, ईश्वर का लाख-लाख शुक्रिया की जान माल की हानि नहीं हुई है। मकान की भारी क्षति हुई है।

यूं तो खड़क का पेड़ जल्दी जड़ से उखड़ता नहीं है लेकिन बरसों बाद पुराना हो जाने से जड़ से गिर जाए तो काफी नुकसान पहुंचाता है। पुराने समय लोग खड़क का पेड़ मकान के समीप नहीं रखते थे क्योंकि इससे वज्रपात का भय बना हुआ रहता था। मवेशियों के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने में खड़क के पेड़ों का बड़ा योगदान रहा है। इन पेड़ों को अधिकांशत: खेतों की मेड़ों, घास के क्षेत्रों, नाले- खालों के पास ज्यादा रोपण किया जाता था। खड़क के पेड़ों का इस्तेमाल सूखे हुए घास के पूरेल्डों के लगाने के काम भी आता है। यद्यपि कुछ इलाकों में इसकी लकड़ी का इस्तेमाल इमारती लकड़ी के रूप में नहीं किया जाता है क्योंकि ऐसा मिथक है कि यह आकाशीय बिजली को अपनी ओर आकर्षित करता है।

पत्रकार के पुश्तैनी मकान के ऊपर गिरा विशालकाय खड़क का पेड़

प्रतिष्ठित हिंदी अनेेक समाचार पत्रों के पूर्व संवाददाता केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’ लंबे समय तक चंबा, नई टिहरी में रहकर पत्रकारिता करते रहे। आर्थिक स्थिति कमजोर रहने के कारण, बाद के वर्षों में उन्होंने अपने गांव के नजदीक नकोट बाजार से ही स्वतंत्र पत्रकार के रूप में अपना कार्य करना आरंभ किया। उनका प्रतिष्ठित न्यूज़ पोर्टल “सरहद का साक्षी” है जो पत्रकारिता के उच्च मानदंडों पर खरा उतरता है और समसामयिक मुद्दों, स्थानीय खबरों, न्यूज़ और व्यूज़ के रूप में उत्कृष्ट न्यूज़ पोर्टल है। जिस तरह उनका परिवार दरख़्त के चपेट में आया, बहुत बड़ी जनहानि हो सकती थी लेकिन छाती महादेव की कृपा से वे सुरक्षित है।

श्री केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’ स्वतंत्र पत्रकार हैं। पूरा जीवन पत्रकारिता में समर्पित किया है और स्वस्थ पत्रकारिता के कारण हमेशा ही आर्थिक अभाव में रहे हैं। शासन -प्रशासन से अनुरोध है कि कलम के सिपाही श्री केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’ की आर्थिक मदद की जानी चाहिए, जिससे कि वह अपने पुश्तैनी मकान का जीर्णोद्धार कर सके और उसे पुनः रहने लायक बना सकें।

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