पति की कामना करने वाली कन्या को विशेषरूप से करना चाहिए यह व्रत, सौ गुना फलदायी है शिवा चतुर्थी का व्रत

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पति की कामना करने वाली कन्या को विशेषरूप से करना चाहिए यह व्रत, सौ गुना फलदायी है शिवा चतुर्थी का व्रत

सौ गुना फलदायी है शिवा चतुर्थी का व्रत

पति की कामना करने वाली कन्या को विशेषरूप से करना चाहिए यह व्रत 

इस दिन चन्द्रमा के दर्शन (चंद्रदर्शन) करने से लगता है मिथ्या कलंक

पति की कामना करनेवाली कन्या को विशेषरूप से यह व्रत करना चाहिए। १९ सितम्बर, मंगलवार २०२३ को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है।
भविष्य पुराण के अनुसार ‘भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का नाम ‘शिवा’ है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को सिद्ध विनायक चतुर्थी, गणेश, कलंक चतुर्थी  के नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन चन्द्रमा के दर्शन (चंद्रदर्शन) होने से मिथ्या कलंक लगता है, पर यदि चतुर्थी तिथि में चन्द्र उदय होकर पंचमी तिथि में अस्त होता है तब इस सिद्धिविनायक व्रत के दिन चन्द्र दर्शन होना दोष कारक नहीं होता है। यदि चन्द्रमा अस्त होते समय चतुर्थी तिथि में है तो अशुभ व दोष कारक है। इस दिन किये गये स्नान, दान, उपवास, जप आदि सत्कर्म सौ गुना हो जाते हैं।

इस दिन जो स्त्री अपने सास-ससुर को गुड़ के तथा नमकीन पुए खिलाती है वह सौभाग्यवती होती है। पति की कामना करने वाली कन्या को विशेषरूप से यह व्रत करना चाहिए।

गणेश-कलंक चतुर्थी (ॐ गं गणपतये नम:, मंत्र का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्न-निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढ़ती है)

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कलंक निवारण के उपाय

इस वर्ष- 18 सितम्बर 2023 सोमवार को चंद्र दर्शन निषेध चन्द्रास्त: रात्रि 08:40

भारतीय शास्त्रों में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रदर्शन निषेध माना गया है इस दिन चंद्रदर्शन करने से व्यक्ति को एक साल में मिथ्या कलंक लगता है। भगवान श्री कृष्ण को भी चंद्रदर्शन का मिथ्या कलंक लगा था।

भाद्रशुक्लचतुथ्र्यायो ज्ञानतोऽज्ञानतोऽपिवा।
अभिशापीभवेच्चन्द्रदर्शनाद्भृशदु:खभाग्॥

जो जानबूझ कर अथवा अनजाने में भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन करेगा, वह अभिशप्त होगा। उसे बहुत दुःख उठाना पडेगा।
गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा देख लेने पर कलंक अवश्य लगता है। ऐसा गणेश जी का बचन है।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रदर्शन न करें यदि भूल से चंद्र दर्शन हो जाये तो उसके निवारण के निमित्त श्रीमद्‌भागवत महापुराण के १०वें स्कंध, ५६-५७वें अध्याय में उल्लेखित स्यमंतक मणि की कथा का श्रवण करना लाभकारक है। जिससेे चंद्रमा के दर्शन से होने वाले मिथ्या कलंक का ज्यादा खतरा नहीं होगा।

चंद्रदर्शन दोष निवारण हेतु मंत्र 

यदि अनिच्छा से चंद्रदर्शन हो जाये तो इस मंत्र से पवित्र किया हुआ जल ग्रहण करना चाहिए। मंत्र का २१, ५४ या १०८ बार जप करें । ऐसा करने से वह तत्काल शुद्ध हो निष्कलंक बना रहता है। मंत्र यह है।

“सिंहः प्रसेनमवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः।”

सुंदर सलोने कुमार! इस मणि के लिये सिंह ने प्रसेन को मारा है और जाम्बवान ने उस सिंह का संहार किया है, अतः तुम रोओ मत, अब इस स्यमंतक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, अध्यायः ७८)
चौथ के चन्द्रदर्शन से कलंक लगता है। परन्तु इस मंत्र-प्रयोग अथवा स्यमन्तक मणि कथा के पढ़ने या श्रवण से उसका प्रभाव कम हो जाता है।

*ज्योतिषाचार्य हर्षमणि बहुगुणा

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