निष्ठा, लग्न और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में जिन्हें जाना जाता है: डॉ. दिनेश जोशी

निष्ठा, लग्न और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में जिन्हें जाना जाता है: डॉ. दिनेश जोशी
निष्ठा, लग्न और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में जिन्हें जाना जाता है: डॉ. दिनेश जोशी


 

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निष्ठा, लग्न और समर्पण से किये गये कार्यों से ही अभिष्ट लक्ष्य हासिल होते हैं

पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री लाखीराम जोशी के सुपुत्र हैं युवा डॉ. दिनेश जोशी

निष्ठा, लग्न और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में जिन्हें जाना जाता है। बात कर रहे हैं, 34 वर्षीय युवा डॉ. दिनेश जोशी की। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय काफलपानी, टिहरी गढ़वाल में कार्यरत डॉ. दिनेश जोशी क्षेत्र में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। निष्ठा, लग्न और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में उन्हें जाना जाता है।

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डॉ. दिनेश जोशी, पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री लाखीराम जोशी के सुपुत्र हैं। जिन्होंने अपने बलबूते पर चिकित्सा के क्षेत्र में अपने को स्थापित किया है। यह उपलब्धि उनके नाम विरासत में नहीं बल्कि स्वयं की लगन और मेहनत के बल पर हासिल हुई है।

डॉ. जोशी प्राथमिक विद्यालय बेरनी के सरकारी बेसिक स्कूल में पढ़े। कुछ समय बाद सरस्वती शिशु मंदिर, चंबा में उन्होंने अध्ययन किया और उसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय पौखाल से कक्षा 06 से 12 तक की शिक्षा ग्रहण की। “होनहार वीरवार के होत चिकने पात” वाली कहावत डा. जोशी पर सटीक बैठती है। जब वे कक्षा आठ में अध्यनरत थे तो उन्होंने वारंगल (हैदराबाद) में ड्राइंग कंपटीशन में प्रतिभाग कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया था। उस समय के हिसाब से ₹5000 का नगद पुरस्कार काफी मायने रखती थी।

डॉ. जोशी ने कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज से बी.ए.एम.एस. की डिग्री हासिल की और उसके पश्चात 2010 में सीएमओ ऑफिस नई टिहरी में स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के अंतर्गत चिकित्सक के रूप में कार्य किया। 2013 में लोक सेवा आयोग से चयनित हुए और अविरल चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

डॉ. दिनेश जोशी को भारतीय चिकित्सा परिषद बोर्ड उत्तराखंड का सदस्य चुना गया है। इसके साथ ही वह 04 बार आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सक सेवा संघ के अध्यक्ष और सचिव रहे तथा अखिल भारतीय चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक का दायित्व भी 2007 में निर्वहन किया। डॉ जोशी कई लब्ध प्रतिष्ठित पुरस्कारों से इस छोटी उम्र में ही सम्मानित किए गए हैं। उन्हें उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा ‘आयुर्वेदिक श्री सम्मान’ से नवाजा गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सेमिनारों में उन्होंने प्रतिभाग किया और इसी क्रम में भूटान में आर्थो-न्यूरो क्षेत्र में उन्हें सम्मानित किया गया। जुलाई 2013 में डॉक्टर दिनेश जोशी दांपत्य सूत्र बंधन में बंधे और डॉक्टर प्रीति जोशी के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ तथा उनकी एक पुत्री है।

डॉ. जोशी एक व्यावहारिक, सामाजिक, मधुर स्वभाव के चिकित्सक हैं। वह अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हुए भी अहंकार से दूर हैं और यथासंभव अपना सर्वोत्तम करने के लिए मेहनत करते हैं।

अनेक असाध्य और लाइलाज बीमारियां जो देहरादून, चंडीगढ़ और मुंबई के डॉक्टर ठीक न कर सके, वे डॉ. जोशी के आयुर्वेदिक ज्ञान के द्वारा चंगे हो गए हैं। मेरे निवास स्थान के समीप रहने के कारण उनकी कार्यप्रणाली और कार्यकुशलता को बखूबी जानता हूं। कुछ वर्षों पूर्वक वह चंबा के आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी का प्रभार भी उन्होंने संभाला।

गठिया, जोड़ों के दर्द, नसों के दर्द, आर्थराइटिस, साइटिका आदि अनेक ऐसे जटिल रोग हैं जिनके मरीज डॉ जोशी के इलाज के द्वारा नया जीवन जी रहे हैं। भले चंगे हो गये।

डॉ. जोशी अभी नवयुवक हैं लेकिन किसी वरिष्ठ, पुराने डॉक्टर से कम जानकार नहीं हैं। उनके ज्ञान और अनुभव का दायरा जैसे-जैसे बढेगा, वैसे वैसे वे शिखर तक पहुंचेंगे, ऐसा मेरा मानना है। आशा करते हैं कि वह अपने क्षेत्र में इसी प्रकार बेहतर करते रहेंगे। अपने क्षेत्र, समाज, प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।

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