नकोट का कृषक महोत्सव महज खानापूर्ति तक सीमित रहा, प्रचार-प्रसार के अभाव में नहीं पहुंच पाये अधिकांश किसान

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नकोट का कृषक महोत्सव महज खानापूर्ति तक सीमित रहा, प्रचार-प्रसार के अभाव में नहीं पहुंच पाये अधिकांश किसान

नकोट का कृषक महोत्सव महज खानापूर्ति तक सीमित रहा, प्रचार-प्रसार के अभाव में नहीं पहुंच पाये अधिकांश किसान

भ्रष्टाचार का पर्याय बनता नजर जा रहा है सरकार का कृषि विभाग

सड़कों की धूल फांक रही है जैविक खादों व कीटनाशकों की बहुत भारी खेप

न्याय पंचायत नकोट अंतर्गत आयोजित कृषक महोत्सव खरीफ 2023 महज खानापूर्ति तक सीमित रहा। प्रचार-प्रसार के अभाव में न्याय पंचायत के अधिकांश किसान कृषक महोत्सव का लाभ नहीं उठा पाये। कृषि विभाग द्वारा महोत्सव को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार नहीं किया गया।

विदित हो कि उत्तराखण्ड शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत 24 अप्रैल से 03 मई 2023 तक जिले की समस्त न्याय पंचायतों में कृषक महोत्सव खरीफ 2023 का आयोजन किया जा रहा है। जिसके क्रम में कृषि रथ भ्रमण कार्यक्रम को रोस्टर जारी किया गया है। इस महोत्सव का श्रीगणेश गत दिवस क्षेत्रीय विधायक किशोर उपाध्याय द्वारा बहुद्देश्यीय हॉल नई टिहरी में किया गया। महोत्सव का उद्देश्य कृषि विकास से संबंधित समस्त योजनाओं एवं कार्यक्रमों से संबंधित समस्त जानकारी किसानों तक पहुंचाया जाना है।

न्याय पंचायत नकोट के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव को लेकर पंचायत के गांवों में कोई प्रचार-प्रसार न होने से अधिकांश किसान इसका लाभ नहीं उठा सके। जिससे क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है।

उत्तराखंड जनमंच टिहरी के जिला सचिव विक्रम सिंह रावत ने विभाग की कार्यप्रणाली पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामीण कस्बा सेन्दुलाधार नकोट न्याय पंचायत नकोट ही नहीं अपितु समूचे मखलोगी प्रखण्ड का केन्द्र स्थल है और कस्बे में लगभग सभी गांवों के किसान व नागरिक रोजमर्रा की वस्तुओं की आपूर्ति हेतु निरन्तर आते जाते हैं, यदि विभाग द्वारा कस्बे में भी थोड़ा प्रचार प्रचार किया जाता तो किसानों को महोत्सव का लाभ मिल सकता। लेकिन कृषि विभाग अपनी बचकानी हरकतों से बाज न आकर महोत्सव को लेकर चैन की नींद सोता रहा।

उन्होंने इस मामले को लेकर रथ संख्या-6 के टीम लीडर व न्याय पंचायत प्रभारी से भी इस बाबत मोबाइल फोन से बात की और जनता के आक्रोश से उन्हें अवगत करवाया।

उन्होंने यह भी अवगत करवाया किया नकोट कस्बा क्षेत्र का केन्द्र बिन्दु है और यहां पर कृषक महोत्सव के लिए सामुदायिक भवन भी मौजूद है, लेकिन विभाग द्वारा केन्द्र स्थल पर महोत्सव आयोजित न कर बाजार से दूर महोत्सव आयोजित किया गया। जबकि इससे पूर्व विभिन्न प्रकार के सामुदायिक कार्यक्रम बाजार के निकट स्थित इस भवन में इससे पूर्व उस समय आयोजित होते आये हैं जब इस भवन की मरम्मत भी नहीं हो पायी थी और जब आज उक्त सामुदायिक विकास भवन पर सरकारी धन खर्च करके उसे सार्वजनिक उपयोग के लिए सुलभ किया गया है तो अब उसका उपयोग ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में क्यों नहीं किया जा रहा है।

नकोट का कृषक महोत्सव महज खानापूर्ति तक सीमित रहा, प्रचार-प्रसार के अभाव में नहीं पहुंच पाये किसानदूसरी ओर यहां पर इस बात का उल्लेख करना समीचीन प्रतीत होता है कि सरकार का कृषि विभाग लगातार भ्रष्टाचार का पर्याय बनता नजर आ रहा है। गत वर्षों विभाग द्वारा किसानों को पूर्व में तो पक्के कम्पोस्ट पिट प्रदान किए गए जो आज भी कहीं न कहीं दिखाई देते हैं, मगर इससे विभागीय अधिकारियों की मंशा पूरी न हुई तो उन्होंने पाली कम्पोस्ट पिट किसानों को प्रदान किए जो आज कहीं भी दृष्टिगत नहीं हो रहे हैं। इस पर विभाग ने सरकार पर कितना चूना लगाया? यह तो विभाग हीं जाने मगर धरातल पर आज उन पाली कम्पोस्ट पिट के अवशेष तक नहीं दिखायी देते हैं।

Compostइधर कुछ महीनों पूर्व विभाग ने गांवों के लिए जैविक खादों की बहुत भारी खेप कीटनाशकों समेत पहुंचायी, वह आज भी सड़कों की धूल फांक रही है। जिसका भौतिक सत्यापन आज भी सड़कों के किनारे किया जा सकता है। इस प्रकार विभाग द्वारा सरकारी धन का दुरुपयोग करके उत्तराखण्ड पर न जाने कितना आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। यह विचारणीय होने के साथ साथ गहन जांच का विषय भी है।

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