धनतेरस और दीपावली इस बार कब मनाई जाएगी?

'धन तेरस' पर करें यह खरीददारी और रखें यह व्रत
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इस वर्ष धन तेरस तेईस अक्टूबर को है, क्योंकि उस दिन सायं छः बजे तक है त्रयोदशी

चौबीस अक्टूबर को है “दीपावली” का पर्व

धनतेरस और दीपावली इस बार कब मनाई जाएगी? इस सन्देह को मन से निकालने के लिए दीपावली पर विशेष।इस वर्ष धन तेरस तेईस अक्टूबर को है, क्योंकि उस दिन सायं छः बजे तक है त्रयोदशी, धनतेरस मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए ही नहीं मनाया जाता अपितु भगवान धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, धन्वन्तरि का प्राकाट्य कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को हुआ था। उसके बाद नरक चतुर्दशी है। नरकासुर का उद्धार भी कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था। वैसे भी वाइस अक्टूबर सायं से तीन दिन तक दीप दान किया जाना चाहिए, अर्थात त्रयोदशी, चतुर्दशी व अमावस्या तक।

अतः इस वर्ष तेइस अक्टूबर सायं छः बजे से पूर्व यम की प्रसन्नता के लिए दक्षिणाभिमुखी दीपक किसी अनाज के पात्र के उपर रखकर तदनन्तर जलाकर यह मंत्र पढ़ें।

मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीयतामिति।।

फिर रात्रि में नरक चतुर्दशी को मनाने के लिए यम के चौदह नामों से तीन तीन अंजलि जल दान करने से वर्ष भर के पाप नष्ट होते हैं। या अपने लोकाचार के अनुसार पूजन – जप आदि किया जा सकता है।

सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अप्रतिम, अद्भुत है दीपावली का हिन्दू महापर्व 

चौबीस अक्टूबर को “दीपावली” का पर्व है, यह पर्व सुख-समृद्धि, उन्नति, अन्त करण की शुद्धता व पवित्रता, सुयश एवं सफलता, घर आंगन की ही नहीं अपितु मन को भी स्वच्छ व निर्मल बनाने की आवश्यकता है इस प्रकार की (छल-कपट रहित) प्रेरणाओं से मन को ओत-प्रोत बनाने का पर्व है।

इस पर्व से अज्ञानता के अंधकार का बन्धन निश्चित रूप से कटेगा ही और विश्व का हर व्यक्ति ईश्वरीय कृपा का पात्र बन कर एक आल्हादित मन धारण कर समाज में परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बन सकेगा। पच्चीस अक्टूबर को सायं साढ़े पांच बजे तक अमावस्या है और चौबीस अक्टूबर सायं छः बजे के बाद प्रारम्भ हो जाएगी अतः दीपावली का पर्व चौबीस अक्टूबर रात को मनाया जायेगा।

दीपावली वाह्य अंधकार को ही नहीं मिटाती अपितु मानसिक अज्ञानता को भी दूर करती है। व्यक्ति ईश्वर से नजदीकी प्राप्त करता है और यही जीवन का लक्ष्य भी है। हम प्रार्थना करें कि परमात्मा हमें हमारे कार्य- व्यवसाय में हमेशा प्रगति और उन्नति की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा प्रदान करने की कृपा करें, जिससे हम बुराईयों को त्यागकर अच्छाइयों को ग्रहण कर इस आत्मा को जीवन जीने की शक्ति प्राप्त करने का सुअवसर प्रदान करने का प्रयास कर सकेंगे। उजाले का पर्व दीपावली हम सबके लिए मंगलमय व कल्याणकारी हो, भगवान का स्नेह सदैव हम सबके साथ रहे, यही शुभकामना करते हुए प्रभु राम के श्री चरणों में विश्व बंधुत्व की भावना करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं, जिनके आदर्श से आज हमें यह पर्व मिला है। रावण अद्वितीय विद्वान था पर अहंकारी था, जिससे उसका सर्वस्व नष्ट हुआ। हनुमानजी विद्यावान गुणी और चातुर थे जिसके फल स्वरूप चिरंजीवी हैं। क्या हमारे अंदर ऐसे गुण नहीं हो सकते हैं? हो सकते हैं यदि हम अहंकार छोड़ दें। प्रयास तो कर ही सकते हैं। आशा है यह दीपोत्सव हर घर में खुशहाली देने वाला होगा।

इस प्रार्थना के साथ-
त्वं ज्योतिस्त्वं रविश्चन्द्रो विद्युदग्निश्च तारका:।
सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः।।

*आचार्य हर्षमणि बहुगुणा

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