द्वितीय शारदीय नवरात्र की अधिष्ठात्री हैं देवी-शक्ति मां भगवती श्री ब्रह्मचारिणी, आइए..!  यूँ करें आवाहन और पूजन

द्वितीय शारदीय नवरात्र की अधिष्ठात्री हैं देवी-शक्ति मां भगवती श्री ब्रह्मचारिणी, आइए..!  यूँ करें आवाहन और पूजन
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द्वितीय शारदीय नवरात्र की अधिष्ठात्री हैं देवी-शक्ति मां भगवती श्री ब्रह्मचारिणी, आइए..!  यूँ करें आवाहन और पूजन। वर्तमान शारदीय नवरात्रों में माँ भगवती दुर्गा के नौ स्वरूपों में आज द्वितीय दिवस की अधिष्ठात्री देवी-शक्ति मां भगवती श्री ब्रह्मचारिणी हैं। आइए..! हम सब मिलकर इन नवरात्र में दुसरे दिन के अधिष्ठात्री भगवती से सृष्टि के सभी जीवों के मंगल एवं कल्याण के लिये भगवती का आवाहन और पूजन करें:-

सरहद का साक्षी @ई./पं.सुन्दर लाल उनियाल

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः

नमःप्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताःस्मताम्

रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः।

ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः॥२॥

कल्याण्यै प्रणता वृद्धयै सिद्धयै कुर्मो नमो नमः

नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै।

ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः॥४॥

अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः

नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥६॥

या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥८॥

या देवी सर्वभुतेषु निद्रारूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१०॥

या देवी सर्वभुतेषु छायारूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१२॥

या देवी सर्वभुतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१४॥

या देवी सर्वभुतेषु जातिरूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१६॥

या देवी सर्वभुतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१८॥

या देवी सर्वभुतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२०॥

या देवी सर्वभुतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२२॥

या देवी सर्वभुतेषु दयारूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२४॥

या देवी सर्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२६॥

इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानां चाखिलेषु या

भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः

चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२८॥

या देवी सर्वभुतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

माँ भगवती आप सभी के मन मनोरथ पूर्ण करे। आप सभी अपने-अपने परिवार सहित जहाँ पर भी हैं वहीं सदैव सुखी, स्वस्थ, समृद्ध एवं निरोगी हों! श्रीचरणों से नित्यप्रति यही कामना एवं हैं।

नवरात्रि की शुभकामनाओं सहित!

 “सरहद का साक्षी’’

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