‘कोटेश्वर घाट’ पर हो दाह- संस्कार में सम्मिलित होने वाले लोगों के बैठने की समुचित व्यवस्था

'कोटेश्वर घाट' पर हो दाह- संस्कार में सम्मिलित होने वाले लोगों के बैठने की समुचित व्यवस्था
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चिलचिलाती हुई धूप और बारिश से मिल सकती है राहत

अनेकों पार्थिव शरीर का होता है होता है प्रतिदिन दाह-संस्कार

कल स्वर्गीय श्री सोहन लाल बहुगुणा जी के अंतिम संस्कार में सम्मिलित होने टिहरी के पावन तीर्थ “कोटेश्वर घाट” में जाना हुआ। यूं तो विचार ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट में पार्थिव शरीर का दाह संस्कार करना सुनिश्चित था, लेकिन हाईवे पर लैंडस्लाइडिंग होने के कारण परिजनों ने कोटेश्वर घाट को ही अंतिम संस्कार के लिए चुना।

*कवि : सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’

विश्व प्रसिद्ध टिहरी डैम और उसका सहयोगी कोटेश्वर बांध विश्व स्तर पर टिहरी के पहचान बन चुका है। टीएचडीसी, टिहरी डैम की व्यवस्था को देखती है। टिहरी डैम के लिए टिहरी वासियों ने अपना सब कुछ खोया। अपनी पुश्तैनी जमीन-जाएजात,अपना घर -द्वार, अपनी संस्कृति,अपनी पहचान, सब कुछ को बांध के लिए खो दिया और उसके एवज में वासियों को मिला केवल कष्ट और मानसिक पीड़ा।

खेद जनक बात यह है कि कोटेश्वर घाट के समीप
टीएचडीसी के द्वारा एक छोटा सा दाह संस्कार टिन सेड बनाया हुआ है जो कि बहुत छोटा है। अगस्त 2019 में क्षेत्र के कुछ जागरूक लोगों के द्वारा जिलाधिकारी टिहरी से निवेदन किया गया था, जिसके एवज में यह व्यवस्था हो पाई थी। इस हेतु प्रगतिशील जन संगठन गजा और सिविल सोसायटी नकोट का प्रयास सराहनीय है। प्रगतिशील जन संगठन के अध्यक्ष श्री दिनेश उनियाल के प्रयासों के कारण स्थानीय घाट में यह छोटा सा सेड बनाया गया जो कि नाकाफी है। क्यारी, कोटेश्वर, कोटी कॉलोनी आदि नवनिर्मित घाट हैं, इन घाटों में दाह संस्कार में सम्मिलित होने वाले लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था पूर्ण नहीं है।

कल कोटेश्वर के घाट पर कई पार्थिव देहों का दाह संस्कार हो रहा था। जिसमें सैकड़ों लोग दाह संस्कार में सम्मिलित थे लेकिन भादों की धूप में अंतिम संस्कार होते होते हुए लोग तेज धूप से चिलबिला गए। कहीं छाया का आसरा नहीं मिला। कुछ लोगों ने दूर पुल के नीचे बैठ कर के समय गुजारा। टीएचडीसी और जिला प्रशासन से निवेदन है कि वह जनकल्याण के कार्यों के लिए स्थानीय घाटों के समीप टिन सेेडों का निर्माण किया जाना अपेक्षित है, जिससे कि बारिश और चिलचिलाती धूप में लोगों को दाह संस्कार कार्य को पूर्ण होने तक सम्मिलित लोगों को सहूलियत मिल सके। कोटेश्वर घाट में जो यह छोटा सा सेड बनाया है जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी महोदय श्री षडमुगम महोदय का योगदान है।अपने कार्यकाल में यह पहल की थी। जन प्रगतिशील जन संगठन के अध्यक्ष श्री दिनेश प्रसाद उनियाल जी से इस बारे में चर्चा भी हुई और उन्हीं के द्वारा पूर्व में किए गए प्रयासों का भी यहां पर यह प्रमाा भी है।

टीएसटीसी सेवा क्षेत्रीय भावनाओं को देखते हुए दाह संस्कार में उपस्थित होने वाले लोगों के लिए घाटों में टिन सेड का निर्माण करें ताकि पार्थिव शरीर के जलने और कर्मकांड की रस्म पूरा होने तक, लोगों को दो-तीन घंटे वर्षा और तेज धूप से निजात मिल सके। कोटेश्वर घाट बिल्कुल जीरो पॉइंट के समानांतर है और मुश्किल से बेस लेबल से हजार मीटर की ऊंचाई पर भी नहीं है। चारों ओर से पहाड़ों से घिरा हुआ यह घाट, नदी की तपती हुई रेत और सुखी चट्टानों के कारण आधा घंटा भी घाट पर बैठना बहुत मुश्किल हो जाता है। हिंदू कर्मकांड की व्यवस्था के अनुसार पार्थिव शरीर के दाह- संस्कार करने में लगभग 3 घंटे का समय लगता है। इसलिए जन कल्याण के इस कार्यों में भी टीएचडीसी की भागीदारी सुनिश्चित हो, जैसा कि टीएचडीसी अनेक जन कल्याण के कार्य करती है और लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास भी करती है। यहां भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

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