कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी से अमावस्या तक दीपावली मनाने वालों के घर को मां लक्ष्मी कभी नहीं छोड़ती

    कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी से अमावस्या तक दीप जला दीपावली मनाने वालों के घर को मां लक्ष्मी कभी नहीं छोड़ती
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    कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है, इस दिन भगवान यमराज को प्रसन्न करने के लिए अरुणोदय से पूर्व तैलादि लेपन कर स्नान करने का विधान है, यद्यपि कार्तिक के महीने तैल का लेपन नहीं करते हैं पर आज के लिए वर्जित नहीं है। अपामार्ग से इस मंत्र के साथ प्रोक्षण करना चाहिए।

    सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्। हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुनः पुनः।।

    स्नान के बाद यम तर्पण करने चाहिए, इससे वर्ष भर के पाप धुल जाते हैं। घर के हर कोने में दीप प्रज्वलित करना चाहिए। यमराज के निमित्त त्रयोदशी से अमावस्या तक दीपक जलाने चाहिए। बलि के दान और भक्ति के प्रभाव से प्रसन्न होकर वामन भगवान ने वर मांगने को कहा। तब बलि ने प्रार्थना की कि प्रभो मेरे राज्य में जो भी व्यक्ति यमराज के निमित्त इन तीनों दिन दीपक जलाएगा उसे यम यातना न हो और इन तीनों दिनों दीपावली मनाने वालों के घर को मां लक्ष्मी कभी भी न छोड़ें। भगवान श्री विष्णु के ‘ऐसा ही होगा’ यह कह कर बलि को उसके मनोनुकूल वर दान किया।

    सरहद का साक्षी @ आचार्य हर्षमणि बहुगुणा

    कतिपय विद्वानों का मत है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी भौम वार को मां अञ्जना देवी के उदर से हनुमान जी का जन्म हुआ। इसलिए हनुमानजी के उपासक इस दिन प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर हनुमज्जयन्ती महोत्सव मनाते हैं। वाल्मिकी रामायण के सुन्दर काण्ड का पाठ करते हैं। परन्तु कुछ शास्त्रज्ञों का मानना है कि हनुमान जी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ तो इस विषयक विवाद को स्थान न देकर यह स्वीकार किया जा सकता है कि इस दिन हनुमज्जयन्ती मनाने का यह कारण होगा कि लङ्काविजय के बाद भगवान राम और सीता माता ने सभी वानरों को यथेष्ठ सम्मान कर विदा किया।

    मां सीता ने हनुमान जी को अपना मोतियों का हार दिया पर जब उस हार के एक एक मोती में राम नाम नहीं मिला तो हनुमानजी सन्तुष्ट नहीं हुए अतः सीता माता ने अपने ललाट पर लगा हुआ सिन्दूर दिया और यह कहा कि ‘ इससे बढ़ कर मेरे पास अधिक महत्व की कोई वस्तु नहीं है अतः तुम इसे प्रसन्नता के साथ धारण करो। और सदैव अजर अमर रहो।’ यही कारण है कि इस दिन हनुमज्जन्म महोत्सव मनाया जाता है और तेल और सिन्दूर चढ़ाया जाता है। नारियां अपना श्रृंगार करती हैं साथ ही घर की सजावट भी करती हैं अतः इस तिथि को रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है।

    आप सब को छोटी बग्वाल, रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी व हनुमज्जन्म महोत्सव की बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई सहित उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना करता हूं।