एनजीओ हब रानीचौरी में टॉयलेट व कूड़ा निस्तारण की सुविधा तक नहीं

No toilet and waste disposal facilities in NGO Hub Ranichauri
No toilet and waste disposal facilities in NGO Hub Ranichauri
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रानीचौरी: रानीचौरी कभी एनजीओ हब हुआ करता था मगर मजेदार बात यह है कि एनजीओ हब रानीचौरी कहलाने वाले इस ग्रामीण कस्बे में शौचालय तो दूर एक सार्वजनिक टॉयलेट तक नहीं है, जबकि भारत व उत्तराखंड सरकार द्वारा एनजीओ के माध्यम से चलायी जाने वाली लगभग सभी योजनायें सबसे पहले यहाँ पर अवस्थित एनजीओ द्वारा क्रियान्वित करवाई जाती हैं।

रिपोर्ट: गोपाल बहुगुणा

एनजीओ हब रानीचौरी बाजार की मुख्य समस्या यहां पर बाथरुम न होना है, जैसा कि सबको पता है,  यहां पर मेगा प्रोजेक्ट हैंडिल करने वाली संस्थाएं होती थी,  इन सामाजिक कहने वाली संस्थाओं ने कभी यहां पर शौचालय निर्माण करने के बारे में नहीं सोचा, इनको इस काम के लिए यहां पर 2 गज  ज़मीन नहीं मिली। अब नेताओं के पास यह समस्या रखो तो वह कहते हैं शौचालय निर्माण के लिए जमीन दो।  जनप्रतिनिधियों से पूछना चाहूँगा जिनकी वर्तमान में सरकार है कि वे उन जगहों को संम्बन्धित विभाग से चिन्हित करवाएं, जो सरकारी हैं और वहां पर बाथरुम का निर्माण करवाया जा सकता है। बस नियति काम करने की होनी चाहिए, प्रधानमंत्री जी की बात याद रखना पहले शौचालय, फिर शिवालय। दूसरी जो समस्या यहां पर है वह कूड़े के निस्तारण की है।  

एनजीओ हब रानीचौरी में सड़कों पर बिखरा कूड़ा साफ दर्शाता है कि यहां पर कूड़े के निस्तारण के लिए सरकारी स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया। वर्तमान में यहां पर एक सफाई कर्मचारी नियुक्त है, वह भी बाजार का कूड़ा इधर-उधर फेंक देता है। उसकी भी मजबूरी है कहां फेंके। इन सब बातों का ध्यान में रखते हुए यहां पर एक बड़े कूड़ेदान की जरूरत है। उपरोक्त सारे काम असंभव नहीं हैं, बस यहां की युवाशक्ति जागृत हो जाए तो वह इन समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार को भी रानीचौरी में खड़ा कर सकती है।