उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा पौड़ी जनपद में समायोजित 48 संस्कारों की ई- व्याख्यानमाला संपन्न

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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा पौड़ी जनपद में समायोजित 48 संस्कारों की ई- व्याख्यानमाला संपन्न
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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की 48 संस्कारों की ई- व्याख्यानमाला

ई- व्याख्यानमाला में हुई 48 संस्कारों की चर्चा

उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा पौड़ी जनपद में समायोजित 48 संस्कारों की ई- व्याख्यानमाला संपन्न हो गई है। इस अवसर पर हरिद्वार से राज्य संयोजक डॉ हरीश चंद्र गुरु रानी जी ने सभी अतिथियों का स्वागत कर अकादमी के अन्य कार्यक्रमों की जानकारी दी।

पौड़ी जनपद के द्वारा ई- व्याख्यानमाला में अकादमी के सचिव डॉ एस पी खाली खाली ने 48 संस्कारों की चर्चा की जो गौतम मुनि ने प्रोक्त, समाज के लिए अधिक उपकारी कहे हैं।

मुख्य अतिथि के रूप में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने गौतम मुनि के द्वारा कहे गए 48 संस्कारों से समाज लाभ उठाएगा यह बात कही।

मुख्य वक्ता केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री गंगा नाथ झा परिसर प्रयागराज वेद विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्र ने वाजपेय, अति रात्र एवं अप्तोर्यामसोमयाग की तीनो संस्थाओं का भली-भांति निरूपण करते हुए इन यज्ञों से परम आनंद की प्राप्ति को बतलाया है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आचार्य सुनील कात्यायन जी ने संपूर्ण व्याख्यान के मर्म को स्थापित करते हुए उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए यह ज्ञानयज्ञ सार्थक होगा, तथा छात्रों के एवं समाज के लिए उपयुक्त बतलाया।

सारस्वत अतिथि डॉ दीपक शर्मा ने इन यज्ञों को 3 ऋणों से मुक्त होने का साधन बतलाया, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसरके नवनियुक्त वर्तमान निदेशक प्रोफेसर पी.वी.बी. सुब्रह्मण्यम विशिष्ट अतिथि के रूप में इस व्याख्यान को छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसे संचित करने का निर्देश दिया।

पौड़ी जनपद के संयोजक डॉ शैलेंद्र प्रसाद उनियाल ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं सहसंयोजक डॉक्टर श्री ओम शर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस व्याख्यान में देश के अनेक भागों से विश्वविद्यालयों के आचार्य एवं छात्र उपस्थित रहे।

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