आजादी के अमृत काल के अवसर पर यह हम सब की जिम्मेदारी है कि भारत में लोकतंत्र को और भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दें: प्रो डीकेपी चौधरी

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आजादी के अमृत काल के अवसर पर यह हम सब की जिम्मेदारी है कि भारत में लोकतंत्र को और भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दें: प्रो डीकेपी चौधरी
आजादी के अमृत काल के अवसर पर यह हम सब की जिम्मेदारी है कि भारत में लोकतंत्र को और भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दें: प्रो डीकेपी चौधरी
आजादी के अमृत काल के अवसर पर यह हम सब की जिम्मेदारी है कि भारत में लोकतंत्र को और भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दें: प्रो डीकेपी चौधरी

आजादी के अमृत काल के अवसर पर यह हम सब की जिम्मेदारी है कि भारत में लोकतंत्र को और भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दें। यह बात प्रो डीकेपी चौधरी ने ऋषिकेश पंडित ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ऋषिकेश परिसर मैं संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, नमामि गंगे प्रकोष्ठ एवं राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में भारत लोकतंत्र की जननी विषय पर व्याख्यान एवं भारतीय लोकतंत्र का पर्व पर कार्यशाला के अवसर पर कही।

 

कार्यशाला का उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परिसर के प्राचार्य के प्रो गुलशन कुमार ढींगरा द्वारा किया गया।

उन्होंने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा राष्ट्रीय संविधान दिवस को राष्ट्रीय कानून दिवस के नाम से भी जाना जाता है।26 नवंबर 1949 को देश की संविधान सभा ने मौजूदा संविधान को विधिवत रूप से स्वीकार किया था, लेकिन इसे स्वीकार किए जाने के दो महीने बाद यानी 26 जनवरी 1950 को इस संविधान को लागू किया गया था। इसी कारण 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो दुर्गा कांत प्रसाद चौधरी ने अपने संबोधन में कहा देश के सर्वोच्च कानून के रूप संविधान नागरिक अधिकार , शासन व्यवस्था एवं सरकार की शक्तियों को नियमित और नियंत्रित करती है।आजादी के अमृत काल के अवसर पर यह हम सब की जिम्मेदारी है कि भारत में लोकतंत्र को और भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दें: प्रो डीकेपी चौधरी

भारत में प्राचीन काल से प्रगतिशील लोकतांत्रिक परंपराएं थी जो कालांतर में संवर्धित भी होती रहीं । आज आजादी के अमृत काल के अवसर पर यह हम सब की जिम्मेदारी है कि भारत में लोकतंत्र को और भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दें। 122 भाषाओं और 170 बोलियां का प्रयोग करने वाले इस बहुसांस्कृतिक देश में लोकतंत्र जनमानस के रगों में रचा बसा है। निश्चित रूप से समय के साथ नए आयाम सामने आएंगे जो लोकतंत्र को जड़ों को और भी मजबूती प्रदान करेंगे।

समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो प्रशांत कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा भारतीय संविधान की प्रस्तावना इसकी आत्मा है प्रस्तावना से मतलब है कि भारतीय संविधान के जो मूल आदर्श हैं उन्हें प्रस्तावनाओं के माध्यम से संविधान में समाहित किया गया है, प्रस्तावना नागरिकों को आपसी भाईचारा बंधुत्व के माध्यम से व्यक्ति के सम्मान तथा देश की एकता अखंडता सुनिश्चित करने का संदेश देती है I

डॉ मनोज शर्मा पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से आए मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा इस दिन हर देशवासी इस बात को लेकर गौरव महसूस करता है कि संविधान हम सब की सर की छत है,भारत का संविधान एक जीवित संविधान है। यह भारत की 135 करोड़ जनता के लिए आस्था, निष्ठा एवं गर्व का केंद्र भी है। हमारे संवैधानिक मूल्य समस्त प्रतिकूलताओं के सामने भी देश को एक सूत्र में पिरोये हुए हैं।

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं नमामि गंगे प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ अशोक कुमार मेंदोला ने संविधान दिवस के अवसर पर छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा दरअसल सबसे पहले सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मंत्रालय ने 26 नवंबर के दिन को संविधान दिवस मनाने का फैसला किया, जिससे इसकी वैल्यूज को प्रमोट किया जा सके। देश के लोगों को संविधान के बारे में जागरुक करने के लिए संविधान दिवस मनाया जाता है।

कार्यक्रम अधिकारी डॉ प्रीति खंडूरी ने अपने संबोधन में कहा संवैधानिक मूल्यों की जानकारी देश के हर नागरिक को हो इसके लिए संविधान दिवस मनाने का फैसला हुआ था। इसलिए इस दिन स्कूल कॉलेजों में भारत का संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा जाता है और भारत के संविधान की विशेषता एवं महत्व पर चर्चा की जाती है।

इस अवसर पर डॉ धीरेंद्र सिंह यादव डॉ सुनीति कुरियाल निजाम आलम, सूरज कुमार मौर्य, सृष्टि आर्य, तन्मय, दीक्षा, साक्षी तिवारी, अभिषेक मिश्रा, दीपक, मनीषा रांग, सिमरन अरोड़ा अभयवर्मा, आयुष चौहान, अनीश पुनिया, प्रेरणा, रोहित सोनी, मीनाक्षी रावत, रोहित, स्वाति, सोनाक्षी, रश्मि, नीरज, अवनि, रीना, रिषिका, अदिति, प्रियांशु, आदर्श, अनुज पाल आदि उपस्थित रहे I

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