आंग्ल नववर्ष की मंगलमय शुभकामनाओं के साथ एक कविता

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आंग्ल नववर्ष की मंगलमय शुभकामनाओं के साथ एक कविता, अरे वर्ष के हर्ष! नव वर्ष! तू क्या रंगत भर लाया।

कवि: सो.ला.सकलानी ‘निशांत’

अरे वर्ष के हर्ष ! नव वर्ष ! तू क्या रंगत भर लाया !
भारतवर्ष की वीर भूमि पर, शौर्य गीत गाने आया।
नव वर्ष के नव सृजन में, बाल सूर्य फिर मुस्काया ।
पारिजात प्रसून सुसुरभित, स्पूर्ति उमंग भर लाया।

बीत गया है वर्ष पुराना जो नूतन पृष्ठ इतिहास बना।
धार पार दिव्य क्षितिज में, वर्ष प्रतीचि में चला गया।
नववर्ष के सुअरुणोदय में, नया गीत बन कर आया।
नव -उमंग की मधु- धाराओं में, नया राग भर लाया।

अब फिर वन में सुमन खिलेंगे, हर मन दीप जलेंगे।
दमक उठेगी दसों दिशाएं, चैत बुरांश पुष्प खिलेंगे।
रक्तिम आभा लिए हुए जब, नभ मंडल भानु हंसेगा,
आल्हादित होगा मेरा मन, हृदय मे शुचि भाव भरेंगे।

फूट उठेगी निर्मल धारा, उर मन के इक कोने में।
नया राग भर भाव बनेंगे, नव- सृजन के प्रहरों में।
पीत पर्ण सौंदर्य नहाकर, जब फ्योंली पुष्प खिलेंगे।
मन की पीड़ा थम जाएगी, बांज बुंरंश की छाया में।

चमक उठेगा कंचन कानन, सुरभित आभा भर कर।
धूप सरक कर जब उतरेगी, संध्या के मधुअधरों पर।
सीढीनुमा खेत छनियां, नव जीवन मधु भर आएंगी।
बसंंत ऋतु की आहट पाते ही,फस्लें भीपक जाएंगी।

रंग-बिरंगे खग- मृग सब तब, नभ कानन में कूदेंगे।
नववर्ष के सुप्रभात संंग, सीत- कुसुम जग जायेंगे।
सुुर संगीत की स्वर लहरी में, नए साज़ बन जाएंगे।
शीतल मंद पवन झोंकों संग, गीत मधुर जब गाएंगे।

अरे वर्ष के हर्ष, नव वर्ष तू, क्या नवरंगत भर लाया।
मेरे भारत की स्वर्णिम माटी में, क्या राग गाने आया।
मै कब से था प्रतिक्षा में, तू भव्य रूप धर मन भाया,
शाश्वत सत्य समय सृष्टि बन,अभिनंदन करने आया।

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